बालगोबिन भगत ने अपनी पुत्रवधू (पतोहू) के प्रति जो व्यवहार किया, उससे उनके कौन-से प्रगतिशील सामाजिक विचार प्रकट होते हैं? सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।
Answer
पुत्रवधू से बेटे की चिता को अग्नि दिलवाना और उसकी दूसरी शादी के आदेश देना बालगोबिन भगत की स्त्री-पुनर्विवाह और रूढ़िवादी सामाजिक परंपराओं के खंडन की प्रगतिशील सोच को दर्शाता है।
Step-by-step solution
- प्रथम चरण: सामाजिक रूढ़ियों का खंडन - हिंदू धर्म और तत्कालीन समाज में अंतिम संस्कार (मुखाग्नि) का अधिकार केवल पुरुषों को था, परंतु भगत ने अपने बेटे का दाह-संस्कार अपनी पुत्रवधू के हाथों से करवाया।
- द्वितीय चरण: स्त्री-पुनर्विवाह का समर्थन - बेटे की श्राद्ध-अवधि पूरी होते ही उन्होंने पुत्रवधू के भाई को बुलाकर आदेश दिया कि इसका दूसरा विवाह करा देना, ताकि उसका भविष्य सुरक्षित और सुखी रहे।
- तृतीय चरण: स्वार्थहीन सोच - जब पुत्रवधू ने सेवा का हवाला देकर रुकना चाहा, तो भगत ने स्वयं घर छोड़कर चले जाने की धमकी दी, जिससे उनकी परोपकारी और मानवीय सोच उजागर होती है।
Common mistake: उत्तर में केवल चिता को अग्नि देने की बात लिखना और पुनर्विवाह वाले मुख्य कदम को भूल जाना।
Concept tested: सामाजिक सुधार और स्त्री-पुनर्विवाह
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