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द्वितीय कवित्त 'फटिक सिहानी सौं सुधार्यो सुधा मंदिर' में पूर्णिमा की चाँदनी रात के सौंदर्य को अभिव्यक्त करने के लिए कवि ने किन-किन उपमानों का प्रयोग किया है?

hard 3 marks Class 10 · हिंदी · देव - सवैया और कवित्त
Answer
कवि ने पूर्णिमा की चाँदनी को स्फटिक शिलाओं से बना सुधा-मंदिर, दही का उमड़ता हुआ समुद्र, दूध का फेन, और तारों भरी रात को दर्पण जैसा स्वच्छ तथा राधा की छवि जैसा सुंदर बताया है।

Step-by-step solution

  1. द्वितीय कवित्त की पंक्तियों का विश्लेषण करें जहाँ चाँदनी का वर्णन है।
  2. कवि ने चाँदनी रात की उज्वलता की तुलना स्फटिक (स्फटिक पत्थर) से निर्मित अमूल्य मंदिर (सुधा मंदिर) से की है।
  3. आकाश में फैली चाँदनी को देखकर ऐसा लगता है मानो दही का समुद्र (दधि को सो उमंगि) सीमाहीन होकर उमड़ रहा हो तथा पृथ्वी पर दूध का फेन (झाग) फैला हुआ हो।
  4. आकाश रूपी स्वच्छ दर्पण में चमकती हुई चाँदनी राधा जी के रूप की परछाई (राधा की छबि सो लागत चंद) जैसी प्रतीत होती है।
Common mistake: विद्यार्थी उपमानों (स्फटिक मंदिर, दही का समुद्र, दूध का फेन, दर्पण) को स्पष्ट न करके केवल इतना लिख देते हैं कि चाँदनी बहुत सफेद और सुंदर लग रही है।

Concept tested: कवित्त में प्रकृति-सौंदर्य और काव्य-शिल्प

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