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कवि देव की काव्य-शैली और शिल्प-सौंदर्य की प्रमुख विशेषताओं पर 'सवैया और कवित्त' पाठ के आधार पर विस्तृत टिप्पणी कीजिए।

hard 5 marks Class 10 · हिंदी · देव - सवैया और कवित्त
Answer
कवि देव की काव्य-शैली में ब्रजभाषा का मधुर प्रयोग, अनुप्रास व रूपक जैसे अलंकारों की छटा, बिंब-विधान तथा प्रकृति का सुंदर मानवीकरण मुख्य विशेषताएँ हैं।

Step-by-step solution

  1. भाषा-सौंदर्य: देव ने सरस, कोमल तथा संगीतात्मक ब्रजभाषा का प्रयोग किया है (जैसे: 'पाँयनि नूपुर मंजु बजै', 'पट पीत')।
  2. अलंकार-योजना: कवि ने अनुप्रास ('कटी किंकिनि', 'पट पीत', 'हिये हुलसै'), रूपक ('जग-मंदिर-दीपक') तथा उपमा अलंकारों का अत्यंत स्वाभाविक प्रयोग किया है।
  3. मानवीकरण एवं बिंब-विधान: प्रथम कवित्त में वसंत को एक बालक के रूप में चित्रित कर प्रकृति का अद्भुत मानवीकरण प्रस्तुत किया गया है। दृश्य-बिंबों से कविता अत्यंत जीवंत बन पड़ी है।
  4. छंद-विधान: सवैया और कवित्त छंदों का लयबद्ध व प्रवाहमयी प्रयोग किया गया है, जिससे पदों में गेयता का गुण आ गया है।
  5. इन सभी शिल्पगत विशेषताओं के कारण देव का काव्य रीतिकालीन सौंदर्य और कलात्मकता का उत्कृष्ट उदाहरण है।
Common mistake: विद्यार्थी शिल्प-सौंदर्य में केवल कविता का अर्थ या भावार्थ लिख देते हैं, जबकि भाषा, अलंकार, छंद और मानवीकरण जैसे तकनीकों का विश्लेषण करना आवश्यक होता है।

Concept tested: देव के सवैया और कवित्त का शिल्प-सौंदर्य

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