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'फ़सल' कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि फ़सल केवल प्रकृति की देन नहीं है, बल्कि मानव श्रम और प्रकृति के सह-अस्तित्व का परिणाम है।

hard 5 marks Class 10 · हिंदी · नागार्जुन - यह दंतुरित मुसकान
Answer
फ़सल नदियों के जल, मिट्टी के गुण, सूरज-हवा के प्रभाव और किसान के अथक शारीरिक परिश्रम का सम्मिलित परिणाम है।

The correct answer is फ़सल नदियों के जल, मिट्टी के गुण, सूरज-हवा के प्रभाव और किसान के अथक शारीरिक परिश्रम का सम्मिलित परिणाम है। — अतः फ़सल प्रकृति के संसाधनों और मनुष्य के श्रम के सुंदर समन्वय का ही प्रतिफल है।

Step-by-step solution

  1. कविता में कवि नागार्जुन बताते हैं कि फ़सल 'नदियों के पानी का जादू' है, अर्थात् जल के बिना फ़सल का विकास संभव नहीं है।
  2. यह 'हजार-हजार खेतों की मिट्टी का गुण-धर्म' है तथा इसे सूरज की किरणों का रूपांतर और हवा की थिरकन प्राप्त होती है, जो प्राकृतिक घटक हैं।
  3. इन प्राकृतिक उपादानों के साथ-साथ इसमें 'लाखों-करोड़ों हाथों के स्पर्श की महिमा' अर्थात् किसानों और मजदूरों का कठोर परिश्रम शामिल है।
  4. अतः फ़सल प्रकृति के संसाधनों और मनुष्य के श्रम के सुंदर समन्वय का ही प्रतिफल है।
Common mistake: उत्तर में केवल प्राकृतिक कारणों का उल्लेख करना और मानव श्रम (किसान के योगदान) को भूल जाना।

Concept tested: फ़सल कविता का मूल भाव

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