पद्य \"यह दंतुरित मुस्कान\" में पंक्ति “सुरभि‑भरी बूँदें गिरती हैं” का आशय स्पष्ट कीजिए।
Answer
यह पंक्ति बरसते हुए वर्षा‑जल को सुगंधित, जीवन‑दायी रूप में दर्शाती है; अर्थात् वर्षा न केवल पानी देती है बल्कि धरती को ताजगी व खुशबू भी प्रदान करती है।
Step-by-step solution
- पद्य में प्रयुक्त शब्द ‘सुरभि‑भरी बूँदें’ को देखें।
- ‘सुरभि’ का शाब्दिक अर्थ सुगंध है; इसे ‘भरी’ के साथ मिलाकर ‘सुगंधित’ समझें।
- ‘बूँदें’ का अर्थ वर्षा के जल के छोटे‑छोटे टुकड़े हैं।
- अतः यह पंक्ति बताती है कि बरसती हुई बारिश केवल पानी नहीं, बल्कि सुगंध भी ले कर आती है।
- संदर्भ में देखें कि कवि ने इसे जीवन‑दायी, उत्साहवर्धक स्वरूप में प्रस्तुत किया है, जिससे प्रकृति की सकारात्मक शक्ति उजागर होती है।
Common mistake: शाब्दिक अर्थ पर ही अडिग रहकर रूपक के गहरे भाव को नहीं समझना।
Concept tested: छंद में रूपक एवं भावार्थ
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