'पीतांबर' तथा 'माता-पिता' शब्दों का विग्रह करते हुए उनमें प्रयुक्त समास का नाम एवं अंतर स्पष्ट कीजिए।
Answer
'पीतांबर' का विग्रह 'पीले हैं वस्त्र जिसके अर्थात् श्रीकृष्ण' (बहुव्रीहि समास) है तथा 'माता-पिता' का विग्रह 'माता और पिता' (द्वंद्व समास) है।
Step-by-step solution
- 'पीतांबर' शब्द का विग्रह 'पीले हैं अंबर (वस्त्र) जिसके अर्थात् श्रीकृष्ण' होता है। इसमें कोई भी पद प्रधान न होकर अन्य पद (श्रीकृष्ण) प्रधान है, इसलिए यह बहुव्रीहि समास है।
- 'माता-पिता' शब्द का विग्रह 'माता और पिता' होता है। इसमें दोनों पद ('माता' और 'पिता') समान रूप से प्रधान हैं तथा विग्रह करने पर 'और' योजक शब्द लगता है, इसलिए यह द्वंद्व समास है।
Common mistake: 'पीतांबर' को केवल कर्मधारय समझ लेना और बहुव्रीहि के विशेष अर्थ वाले पहलू को अनदेखा कर देना।
Concept tested: बहुव्रीहि और द्वंद्व समास में अंतर
Published · How this solution was prepared and checked
Related questions
- 1 'दशानन' और 'त्रिभुज' दोनों शब्दों में पहला पद संख्यावाची है। उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए कि इनमें से कौन-सा द्विगु समास है और कौन-सा बहुव्रीहि समास, और क्यों?
- 2 निम्नलिखित समस्त पदों का विग्रह करके समास का नाम लिखिए: (i) यथाशक्ति, (ii) प्रतिदिन।
- 3 'छाया मत छूना' कविता में 'छाया' शब्द का प्रयोग किस अर्थ में हुआ है?
- 4 'छाया मत छूना' कविता में निहित मुख्य संदेश का विश्लेषण कीजिए। यह कविता आधुनिक युग के तनावग्रस्त मनुष्य के लिए किस प्रकार प्रासंगिक है?
- 5 'प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है'— इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए और बताइए कि कवि ने इसे मृगतृष्णा क्यों कहा है?
- 6 'संगतकार' कविता केवल संगीत के क्षेत्र तक सीमित न होकर जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत ऐसे सहयोगियों की ओर संकेत करती है। सोदाहरण स्पष्ट कीजिए।